प्रथम स्वाधीनता संग्राम के अठारह बलिदानियों के वलिदान दिवस पर जले श्रद्धा के दीप*

*-बलिदानी राम प्रसाद पाठक और उनके साथ वलिदान 17 क्रान्तिकारियों को किया याद*
*औरैया।* भारत प्रेरणा मंच के तत्वावधान में शुक्रवार को देवकली मंदिर के निकट स्थित स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर बलिदानियों को याद किया गया।
संस्था के महासचिव अविनाश अग्निहोत्री ने बताया कि प्रथम स्वाधीनता संग्राम में 24-25 जून 1857 को जनपद औरैया के रणबाकुँरों ने अंग्रेजी सरकार के विरुद्ध जंग का खुला ऐलान करते हुए औरैया और बेला तहसील पर हमला कर दोनों तहसीलो को व्रिटिश शासन से स्वतन्त्र करा लिया। लगभग 6 महीने तक औरैया ने व्रिटिश शासन से स्वतन्त्र रहकर स्वदेशी सत्ता का सुख भोगा। इस बीच अंग्रेजो ने औरैया पर पुनः सत्ता स्थापित करने के कई प्रयास किये। लेकिन उनके सभी प्रयास क्रान्तिकारी सेना द्वारा विफल कर दिये गये । अन्त में मजबूर होकर तत्कालीन इटावा के कलेक्टर ए ओ ह्यूम ने आगरा ग्वालियर से अतिरिक्त सैन्यबल मंगाकर और प्रतापनेर के कुँवर जोर सिंह लखना के ईश्वर चन्द्र और जसवन्त राव को साथ लेकर 28 नवम्बर1857 को देवकली मन्दिर मे शरण लिये क्रान्तिकारी सेना पर हमला कर दिया। क्रान्तिकारी सेना भी खानपुर के राम प्रसाद पाठक के नेतृत्व में अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध में आ डटी। जैसे ही फिरंगी सेना की देवकली मन्दिर पर हमले की खबर चारो ओर फैली। बैसे ही भरेह के कुँवर रुप सिंह चकरनगर के राजा निरंजन सिंह भदेख के राजा परीक्षत और सिकंदरा के राजा अपने अपने सैन्यबल के साथ देवकली मन्दिर क्षेत्र में अंग्रेजी सेना के विरुद्ध युद्ध मे आ डटे। दिन भर भयंकर युद्ध चला। .कान्तिकारी सेना ने चार अंग्रेज अफसरों सहित उनके कई सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया। हार का स्वाद चखकर व्रिटिश सेना शाम को औरैया की तरफ हटकर आ गयी। जबकि क्रान्तिकारी सेना मन्दिर प्रांगण में ही रुकी रही। 29 नवम्बर 1857 को प्रातः अंग्रेजो ने विशाल सेना के साथ अपनी नयी रणनीति के तहत सेना को दो भागों में विभक्त कर क्रान्तिकारियों पर भीषण हमला हमला बोल दिया। क्रान्तिकारी सेना भी उत्साह के साथ अंग्रेजों से लोहा लेने लगी। इसी बीच अंग्रेजो की दूसरी सैन्य टुकड़ी ने पीछे से कान्तिकारियों पर हमला कर दिया । इस अचानक हुए हमले में रामप्रसाद पाठक और उनके 17 साथी इस आजादी के युद्ध में वलिदान हो गये । बाद में ए ओ ह्यूम ने अपने उच्च अधिकारियों से किये गये पत्राचार में अमर शहीद रामप्रसाद पाठक को रियल लीडर आफ दा फील्ड लिखकर सम्बोघित किया। युद्ध मारे गये चार ब्रिटिश अधिकारियों के शवों को अंग्रेजों ने वर्तमान फायर ब्रिगेड स्टेशन औरैया के पीछे तलैया के पास दफनाया था। इस कारण वह तलैया गोरन की तलैया बजती थी । युद्ध मे साथ देने के एबज में अंग्रेजों ने अपने वफादार और देश के गददार ईश्वरचन्द्र सहित दो लोगों को सितारे हिन्द का खिताब दिया था। आन्नदम घाम आश्रम में कैप्टन निर्भय सिंह गुर्जर की अध्यक्षता और रमन पोरवाल धुन्ना श्रीवास्तव अर्पित दुबे के आतिथ्य में एक सभा भी आयोजित की गयी। जिसमें संस्था के अध्यक्ष राष्ट्रीय कवि अजय अंजाम ने कविताओं के माध्यम से बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सभी आये हुए गणमान्य जनो का अंकित तिवारी ने आभार व्यक्त किया। कैप्टन वी डी यादव कुँवर सिंह चौहान नरेन्द्र सिंह सेंगर राजेन्द्र प्रसाद तिवारी के के चर्तुवेदी लाली वर्मा अजय गुप्ता कपिल गुप्ता आशीष चौबे कवि गोपाल पांडे, विशाल दुबे समेत अनेक गणमान्य जन मौजूद रहें।